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smtpushpapandey


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हारियो न हिम्मत बिसारियो न राम

Posted On: 19 May, 2016  
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Social Issues social issues में

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दिल्ली में बीजेपी की हार के कारण

Posted On: 10 Feb, 2015  
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भारत की पहचान जनता जनार्जन महान

Posted On: 2 Oct, 2014  
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देख तेरे भारत कि हालत कविता

Posted On: 22 Mar, 2014  
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एक तीर निशाने तीन

Posted On: 3 May, 2013  
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rape pollution

Posted On: 22 Apr, 2013  
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rape

Posted On: 22 Apr, 2013  
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सारे फसाद की जड़ मुई शराब

Posted On: 28 Dec, 2012  
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नैतिक पतन और मानव का गिरता मनोबल

Posted On: 17 Jul, 2012  
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बत्तीसी और बेचारी जीभ

Posted On: 5 Jun, 2012  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

मुन्नी बदनाम हो गयी शीला की जवानी में पउवा चढ़ाके आई आदि अनेक कई ऐसे भद्दे और गंदे गाने हैं जिनमे अभिनेत्रियों ने खूब खुलकर अंग प्रदर्शन किया है और काफी हद तक विज्ञापन भी दोषी हैं बॉडी केयर manforce कंडोम आदि ऐसे कई गंदे विज्ञापन हैं जिनको बाल्यावस्था से ही लड़के टीवी पर देखते हैं उनकी भावनाओं पर गलत प्रभाव पड़ता है और ब्लू फिल्म आती कहाँ से हैं जिसे देखकर युवा वर्ग बिगड़ रहा है यही नहीं शराब और नशीले पदार्थ भी इन बुराइयों की जडें हैं क्योंकि rape जैसे काण्ड में हमेशा येही देखने को मिलता है की बलात्कारियों ने शराब पी रखी थी उसके बाद इस वारदात को अंजाम दिया यह फ़िल्मी हस्तियाँ गंदे फिल्मों में काफी पैसा कमाते हैं और गरीब तबके का आदमी मेहनत मजदूरी करके उन पैसों से खाना तो ढंग का नहीं खायेगा लेकिन गन्दी फिल्में जरुर देखेगा और यह शराब के ठेकेदार शराब बेचकर गरीबों का पैसा लूटकर खूब मोटे पैसे कमा रहे हैं और ऐश कर रहे हैं इसलिए हम सभी को चाहिए की सबसे पहले इन लोगों पर ही शिकंजा कसना चाहिए केवल सरकार और पुलिस को ही दोषी ठहराना उचित नहीं है यह फ़िल्मी हस्तियाँ इतनी मक्कार हैं गंदे गंदे पहनावे पहनकर पश्चिमी सभ्यता का डांस करके भारतवर्ष की गरीब और भोली जनता को प्रदूषित कर रहे हैं और फिर दिखावे के लिए सडकों पर कैंडल मार्च करते हैं, बहुत सटीक लेखन दिया है अजय जी आपने ! ये दिखावटी हैं , सब को येन केन प्रकारेण पैसा चाहिए ! ढकोसला करते हैं सब

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

आदरणीया पुष्पा पाण्डेय जी सादर, सुन्दर आलेख लिखा है आपने. शराबी के बारे में तो आपने शायद एक खाका बना रखा है. मैं किसी शराबी की हिमायत नहीं कर रहा किन्तु सतत बढती इन घटनाओं में शराब कोई मुख्य कारण रही हो ऐसा मुझे  नहीं लगा. मानसिकता की बात है और इसके लिए आपने अन्य जो कारण दिए हैं उस सभी पर मेरी सहमति है. सरकार यदि वाकई कुछ करना चाहती है तो फिर फिल्म जगत और नेट पर उपलब्ध अशलीलता को नियंत्रित करे. पाठशालाओं में बच्चों को अच्छे संस्कार दिए जाएँ, दुःख होता है जब आज का शिक्षक वर्ग भी इस तरह के घ्रणित कार्यों में संलिप्त पाया जाता है. एक चित्र कुछदिनों से फेसबुक पर है एक बालात्कारी को गोली मारी जा रही है, तब लगता है की जहाँ ऐसी सख्त सजाएं होने के बाद भी अपराध हो रहे हैं तब हम फांसी की सजा का प्रावधान करके भी क्या बेटियों को सुरक्षित कर सकेंगे? प्रश्न अनुत्तरित है.

के द्वारा: akraktale akraktale

आदरणीया श्रीमती पुष्पा पाण्डेय जी! आज पहली बार आपको पढ़ा...आज कल बढते जघन्य अपराध पर बहुत ही सही बात और सच्ची.......इसकी जड़ें कहाँ पनप रही हैं, और कैसे ये अपराध जड़ सहित समाप्त की जा सकती हैं, इसका उत्तर बखूबी दिया आपने...पर अभी जो वारदात हो रहीं उनकी सजा क्या होगी इसके बारे में कुछ नहीं लिखा आपने.? मेरे हिसाब से फांसी देना या आजीवन कारावास इन दरिंदों के लिए उचित नहीं.....इन्हें नपुंसक बनाकर या हाथ-पैर काट कर छोड़ देना चाहिए जिससे ये लागातार हर रोज समाज को सीख देते रहें कि 'अगर आप मेरी तरह करोगे तो मेरी तरह हालात पर पहुंचोगे..आप एक जिन्दा लाश बन जाओगे और मौत की भीख मांगोगे परन्तु भगवान तुम्हे मौत भी नहीं देगा......." फाँसी रेप के लिए मुझे ठीक इसलिए नहीं जान पड़ती है क्योंकि आतंकवाद को खत्म करने के प्रयास में कई आतंकवादियों को फाँसी दी गई जिसमे दो तो बहुत जल्दी की घटना अजमल कसाब और अफजल गुरु..पर उसके बाद भी चीनी सैनिक बोर्डर पर आ टिके हैं और भारतीये सरकार बात-चीत करना चाहती है..........अर्थात आतंक को बढ़ावा देने वाले ये भूल जाते हैं कि इसका परिणाम बड़ा भयंकर होगा....जब उन्हें असहाय अवस्था में छोड़ दिया जाएगा तो वे समाज को सबक सिखाते रहेंगे इसीलीये मैंने ऊपर ही कहा है कि बलात्कारियों को फाँसी नहीं होनी चाहिए.......... इसके लिए किये जा रहे दिखावे से मैं भी परेशान हूँ...जैसे जब "दामिनी रेप-काण्ड " हुआ था तो जनता ऐसे आक्रोशित हुई जैसे लगा अब सब कुछ बदल जाएगा पर हमारे नेताओं ने गलत बयान बाजी करके जनता का ध्यान मुद्दे से भटका दिया.और कुछ दिनों में सब कुछ ठण्डा पड़ गया..अर्थात कहीं न कहीं इसमें हमारी भी गलती है....इसके लिए आंदोलन या अनशन की नहीं जागरण की जरूरत है......

के द्वारा: ashishgonda ashishgonda

आदरणीय भरोदिया जी में सोनिया की सहेली ही नहीं उनकी करीबी भी हूँ हमारे महामूर्ख मंच में आपका स्वागत है आपने जो विपरीत प्रतिक्रिया की है उसके लिए धन्यवाद यदि आने वाले चुनावो में सोनिया जी पुनः जीत गयी तो उनकी जीत की ख़ुशी में हम महामूर्ख मंच के लोग आपको जरुर आमंत्रित करेंगे धन्यवाद नमस्कार पुश्पा बहेन हम यहां देश के कोने कोने से ईकठ्ठा हुए हैं, अपने अपने संस्कार और विचारों को लेकर । सब के विचारों के टकराने से ही नये विचार पैदा होते हैं । और ब्लोग का उद्देश्य भी यही है । आओ, अपने अपने विचार रख्खो और विचारों का एक नया जहान बनाओ । सब की हां में हां मिलाना या जुठी तारिफ करना कोइ मतलब नही है । यहां सब मेम्बर मित्र ही है । विचारों के टकराव से मित्रता कम नही होनी चाहीए । लेकिन देखा गया है मित्रता कम तो क्या शत्रुता पर लोग आ जाते हैं । ये बताता है की हम ब्लोग तक तो पहुंच गये पर ब्लोगर की पीढता नही आई है । न जाने क्यों मुझे आप की ये लाईन पढ के लगा की आप ने मेरा कोमेन्ट एक ब्लोगर की तरह सहजता से नही लिया है, आप को तकलीफ हुई है । अगर ऐसा है तो मुझे खेद है और आखरी बार टकरा के निकल जाता हुं आप के ब्लोग से । बहन जी अपना ही लेख बराबर देख लो । कहीं भी नही लगता है की मुरख मंच आप का हो । मुरख मंच तो हम मुरखों का है ना ? हमें बचपन में सिखाया गया था “ भारत मेरा देश है । सब भारतिय मेरे भाई बहन है ।“ मैं भारतिय हुं, राजीव गांधी भारतिय थे । मुझ से उमर में बहुत बडे थे, मेरे बडे भाई समान हुए । तो जाहिर है सोनिया भाभी मेरी भाभी हुई । आप बोलती है मैं उन की करीबी हुं तो मैं उन का देवर क्या हुआ ? मैंने कभी अपनी सोनियाभाभी का पक्ष नही लिया । आप को तो बस वही दिखती है । उपर का कोमेन्ट आप के लेख के लिए नही था उसे निकाल दिजीए । विस्तार से बताया है मेरे ब्लोग में आप को । --

के द्वारा: bharodiya bharodiya

राज कमलभाई नमस्ते भूखे को कच्चे पक्के से क्या लेना देना---कुदरत का नियम तो ईस से भी क्रुर है । कुदरत ने नर और मादा बना के छोड दिया, ना कोइ बहन, ना भाई, ना मां, ना बाप । उसमें रिश्ते नाते, उमर या समय का कोइ बंधन नही, सिर्फ ईच्छा ही महत्व की है । आदमी ने देखा ईस का परिणाम घातक है । एक मादा के लिए नरों में लडाई होती है । आदमी ने अपनी बुध्धि के कारण कुदरत के नियम को नियंत्रित किया और लग्नप्रथा की खोज की । एक नर के लिए एक मादा, एक आदमी के लिए एक स्त्री । यही एक रास्ता बचा था आदमी के पास जीस से मानव समुदाई सुख-शान्ति से रह सके । वेस्ट तो चल पडा है कुदरत ही और और चाहता है ईस्ट भी ऐसा ही करें । लेकिन ईस्ट है जो अपने सामाजीक ढांचे को तोडना नही चाहता । ईस्ट की लालची सरकारों को खरीदा जाता है ईसे तोडने के लिए । तलाक को आसान बनाने का कानून एक द्रष्टांत है हमारे सामने । ईस्ट के बुध्धिजीवीयों को भी भरमाया जाता है । ईस का सबूत है की ईन दिनों भारत के रीवाजों को लेकर कुछ लेख भावुकता पूर्ण तरिके से जेजे में चिपकाये गये हैं । बेटी सिर्फ भारत में ही पराई होती है ? दुसरे देश घरमें ही ब्याहते हैं ? सिर्फ भारतिय रिवाजों को नीचा दिखाने की चाल है - जो कोइ समजना नही चाहता, भावना में बह जाता है । सरकार की बात करें तो उन का अलग एजेन्डा है । तरह तरह की वोट बैंक की तरह नारी समुदाय भी एक अच्छा वोट बैंक बन सकता है । ईस के लिए दिखाना पडता है की हम आप के तारणहार है । सरकार के अनुसार कहें तो १८ के अंदर की लडकी को ही संरक्षण की जरूरत है । १८ के बाद नही, चाहे जो करना हो उस के साथ करलो । १८ के अंदर के लडके से कोइ ३० साल की औरत अपना काम निकाल ले तो कोइ तकलीफ नही । लडकों को संरक्षण की जरूरत नही है । ---

के द्वारा: bharodiya bharodiya

आदरणीया ,.सादर प्रणाम आपकी यह बात बहुत अछि लगी कि राजा और प्रजा दोनों को सुधरना होगा ,..अब राजा के दिन गए ,..सुधरी प्रजा ही राज करेगी !!... वो राजा के भेष में विदेशिओं और पूँजीपतियो के दलाल हैं ,.अफ़सोस इस बात का है कि विपक्ष भी उनका सहायक है ,..मूरखों की लाचारी है कि उनको कटु भाषा का प्रयोग करना ही पड़ेगा ...जहाँ तक प्रधानमन्त्री जी का प्रश्न है कुछ कहने की जरूरत नहीं उसे पूरा देश जानता है ,..जब गिरहकट पकड़ा जाता है तो सर नीचे करके भरपूर जूते खाना उसके लिए सबसे आसान रास्ता होता है ..आखिर में हम और आप जैसे दयावश उसको बचाते ही हैं .. नेहरू की अय्याशी के पक्ष में दिया गया आपका तर्क आपकी विद्वता और सभ्यता पर बड़ा सा प्रश्नचिन्ह लगाता है ,.आशा करता हूँ कि आप पुनर्विचार करेंगी ,................नेहरू ने महान क्रान्तिकारियो के सपनो की लाश पर अपनी कुर्सी लगाई थी ,..आजादी के बाद एक विदेशी पत्रकार से निजी मुलाक़ात में उसने गांधी जी को भयंकर ढोंगी बुड्ढा कहा था ...शेष आप बहुत समझदार हैं ....सादर आभार सहित

के द्वारा: Santosh Kumar Santosh Kumar

आदरणीय  पुष्पा जी यह सच  है कि हम  जिस  तरह के अशब्दों का प्रयोग अपने महापुरुषों के लिये करते हैं वह उचित  नहीं है, किन्तु इसका यह अर्थ नहीं है कि उन्होंने जाने अनजाने तो अपराध  किये है वह नजर अंदाज  कर दिये जायें। चाहे वह आदरणीय  प्रथम  प्रधानमंत्री ने किये हों या वर्तमान प्रधानमंत्री ने। यदि किसी सरकार में कोई भी घपला, भ्रष्टाचार आद होता  है तो उसकी सीधे जिम्मेदारी प्रधानमंत्री की होती है। वैसै तो पूरे मंत्रीमंडल की सामूहिक  जिम्मेदारी होती है। यह सच है कि हमारे प्रथम  प्रधानमंत्री जी  ने आजादी के पूर्व  कई बार जेल  यात्रायें की हैं। किन्तु उन्होंने वैसी यातनायें नहीं झेलीं जैसी अन्य क्राँतिकारियों ने झेलीं हैं। उस  जेल  जाने के प्रतिफल  स्वरुप उन्हें देश  का प्रधानमंत्री का पद प्राप्त हुआ  । जबकि उसेक  वास्तविक अधिकारी सरदार वल्लभभाई पटेल  थे। गाँधी जी के वात्सल्य  के कारण ऐसा हुआ। अशिष्ट भाषा के प्रयोग  की मैं भर्तसना करता हूँ, चाहे वह  किसी के प्रति भी हो। किन्तु आलोचना करने का हमारा अधिकार है। कृपया मेरे इस  आलेख  पर अपने विचारों से अवगत  करायें। http://dineshaastik.jagranjunction.com/2012/06/06/%E0%A4%AE%E0%A5%83%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%81-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%83%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%81/मृत्यु के पूर्व  और मृत्यु के बाद

के द्वारा: dineshaastik dineshaastik

पुष्पा जी, दहेज़ समाज की ऐसी कुरीति है कि जिससे समाज खुद परेशान है किन्तु वही उसे ज़िंदा भी रखे हुए है.क्योंकि जब लड़के कि बारी हो तो दहेज़ अच्छा लगने लगता है और जब लड़की कि बारी आती है तो यह बुराई नजर आने लगती है.जैसे रिश्वत देना हो तो वह भ्रष्टाचार बन जाती है और लेना हो तो सुविधा राशि बन जाती है. हम खुद ही बुराइयों से निकलना नहीं चाहते तो फिर ये ख़त्म कैसे हो.जब तक हमारी आखों पर लालच का चश्मा चदा रहेगा तब तक यही हश्र होगा करेगा कोई और भरेगा कोई. इस ब्लॉग पर प्रतिक्रियाएं तीन चार दिनों से दी जा रही हैं. किन्तु आपने किसी पर भी धन्यवाद ज्ञापित नहीं किया है.ब्लोगर्स समय निकाल कर प्रतिक्रियाएं देते है इसीलिए मेरा आपसे अनुरोध है कि आप भी कुछ समय दे कर प्रतिक्रियाओं पर धन्यवाद अवश्य ज्ञापित किया करें.

के द्वारा: akraktale akraktale

के द्वारा: PRADEEP KUSHWAHA PRADEEP KUSHWAHA




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